After two years, all the accused for '2012 Delhi Rape Case', are still alive.(Except for the one who committed suicide).
After hearing, in fragments, what Mukesh(One of the accused)had to say about what he did, this is what I can say.

ऐे मेरे समाज के बन्दो,
ज़रा गाथा मेरी याद करो।
मूक हूँ मैं इस दुनिया में अब,
पर चीखें मेरी याद करो।
जो खड़ी है बन इन्साफ की देवी,
उस से, मेरी भी फ़रियाद करो।
ज़रा गाथा मेरी याद करो।

एक मासूम कली थी मैं।
बड़े नाज़ों से पली थी मैं।
अभी आंच तो जलनी, शुरू ही थी।
बन ज्वाला ना जली थी मैं।
सपने मैंने अभी, बुने ही थे।
कांटे राहों के, चुने ही थे।
जो रौंद गया मेरे फूलों को।
अब उसका भी इन्साफ करो।
ज़रा गाथा मेरी याद करो।

वो रात गजब अंधियारी थी।
जब गाज वो गिरने वाली थी।
वो दो घंटे की चोट के वार ।
वो सब चोटों पे भारी थी।
वो भेड़िये, मुझे नोच गये।
वो मार गये, खरोच गये।
लड़ती मैं कभी, विनती करती।
यूँ मुझको न बर्बाद करो।
ज़रा गाथा मेरी याद करो।

मुझे मार काट के छोड़ दिया।
मेरी हस्ती को, झंझोड़ दिया।
मेरा जीवन सीधा, सरल सा था।
हर पंथ को मेरे मोड़ दिया।
फिर भी तेरह रोज़ लड़ी।
आखिर अर्थी पर आन पड़ी।
जीवन को मैंने विदा कहा।
अब मुझको बस आज़ाद करो।
ज़रा गाथा मेरी याद करो।

जो लेके चलें हैं ज्योति को।
उनसे मेरी ये विनती है।
मुझ जैसी हैं कई मूक यहाँ।
नहीं जिनकी कोई गिनती है।
फांसी दो इक-दो पापी को।
नपुंसक कर दो बाकि को।
जो मेरी गलती बोल गया।
उसे मार दो,
फिर कुछ बात करो।
ज़रा गाथा मेरी याद करो।

- अभिषेक

'I am sorry for being a part of this society.May your soul find peace.'

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