वो झूठा ही सही पर चार दिन का प्यार देने आया था मुझे,
मेरे ख्वाब कितने कच्चे हैं वो ये बताने आया था मुझे..
वो आया तो कुछ गुमान हुआ था मुझे मेरी ज़िंदगी पर,
पर रेत पे बने महल नहीं टिकते वो ये दिखाने आया था मुझे..
करता था गुफ्तगू उन दिनों वो नर्म लहजे में मुझसे,
वक़्त सबको झुका देता है वो ये दिखाने आया था मुझे..
कर दी तिज़ारत मोहब्बत के बाज़ार में अशारों की मेरे,
खेल ज़िंदगी का अकेले जीतना वो ये सिखाने आया था मुझे..
वो झूठा ही सही पर चार दिन का प्यार देने आया था मुझे...........

#Baaz(d nestless bird)

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