प्यार के चंद नज़राने दे दो,

जो बीत गए वो ज़माने दे दो,

यूँ रूठ के क्यों चल पड़े ,

चलो और कुछ न सही,

जीने के कुछ बहाने दे दो।

मुमकिन होता तो चाँद भी देती तुन्हें,

फूल तो कुचल दिए थे तुमने,

दिल से लेकर काम, नाराज़ किया तुम्हे,

तर्क से हरा दिया तुमने,

मोहब्बत में जज़्बातों भरे

कुछ हसीन फ़साने दे दो।

चलो और कुछ न सही,

जीने के कुछ बहाने दे दो।

 

 

 

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